संजीव शुक्ल ‘अतुल’

कुछ मन की बातें

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सत्ता है अब नगर वधू

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सत्ता है अब नगर वधू , हर कोई उसको छूना चाहे ,,
मर्यादा की फांद दीवारे , उसको हर कोई पाना चाहे ,,
दल बदले , निष्ठाएं बदलीं , टूट गयी सब मर्यादाएँ ,,
लोकतंत्र के अन्तःपुर में , हर कोई अब घुसना चाहे ,,
सत्ता के इस चक्रव्यूह में सौ सौ अभिमन्यू फंसे हुए ,,
द्यूत समझ जनसेवा को , अब हर शकुनी जय करना चाहे ,,
सत्य -असत्य , अनीति -नीति की व्याख्याएं तब कौन सुनेगा ,,
जब शासन हो धृतराष्ट्र अंध का ………….पूरा पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करें ….

http://sanjeevshuklaatul.blogspot.in/2013/04/satta-hai-ab-nagar-vadhu.html

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